गाज़ीपुर में अखिलेश का सपना हो पायेगा पूरा या गाज़ीपुर की सपना पड़ेगी भारी?

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गाज़ीपुर में अखिलेश का सपना हो पायेगा पूरा या गाज़ीपुर की सपना पड़ेगी भारी?

ग़ाज़ीपुर।आगामी 3 जुलाई को होने वाले जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर सियासी पारा परवान पर है।इस चुनाव में अध्यक्ष पद की प्रतिष्ठा परक कुर्सी पर काबिज होने के लिए हर सियासी दांव पेंच राजनैतिक धुरंधर आजमाने में जुटे हुए है।जिला पंचायत अध्यक्ष के पद के चुनाव को लेकर प्रत्याशियों के नामांकन और नाम वापसी की प्रक्रिया के बाद अब चुनावी मैदान में महज 2 प्रत्याशी है।

जाहिर सी बात है कि अब इन्ही दो उम्मीदवारों के बीच सीधी टक्कर होगी।अध्य्क्ष पद के लिए सपा से कुसुमलता यादव और बीजेपी से सपना सिंह चुनावी मैदान में डटी हुई है।जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव की घोषणा के साथ ही जिले में सियासी समीकरण बनने लगे थे।इस शुरुआती दौर में जहां बीजेपी से वंदना यादव अपनी उम्मीदवारी का दम भर रही थी।वही निर्दल प्रत्याशी के रूप में सपना सिंह ने अध्य्क्ष पद के लिए दावेदारी की थी।

जबकि सपा ने कुसुमलता यादव को अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया था।लेकिन सियासी समीकरणों में उलट फेर करते हुए सपना सिंह ने नामांकन के एक दिन पहले बीजेपी की सदस्यता ली,और एक घण्टे के अंदर ही उन्हें बीजेपी ने अपना प्रत्याशी घोषित कर दिया।ऐसे में वंदना यादव की दावेदारी का पत्ता साफ हो गया।इस सियासी उलट फेर के बाद जिला पंचायत अध्यक्ष के चुनाव को लेकर नए सियासी समीकरण बन गए।राजनैतिक सूत्रों के मुताबिक एमएलसी विशाल सिंह चंचल की रिश्तेदार सपना सिंह जिला पंचायत सदस्य निर्वाचित होने के बाद से ही अध्यक्ष पद की दावेदारी की तैयारियों में जुटी हुई थीं,और वंदना यादव के मुकाबले बीजेपी आलाकमान को अपनी जीत का भरोसा दिलाने में कामयाब रही।बताया जा रहा है कि इस पूरे सियासी उलटफेर में एलएलसी विशाल सिंह चंचल की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण रही।

राजनैतिक सूत्रों की माने विशाल सिंह चंचल ने सपना की जीत का पक्का भरोसा बीजेपी आलाकमान और सीएम योगी आदित्यनाथ को दिया।जिसके बाद जिले के प्रभारी कौशलेंद्र सिंह पटेल और यूपी के राज्यमंत्री आनंद स्वरूप शुक्ला ने जिले में आकर इस भरोसे की तस्दीक भी की।बताया जा रहा है कि दोनों नेताओं ने वंदना यादव और सपना सिंह से समर्थक जिला पंचायत सदस्यों की संख्या के बाबत अलग अलग मीटिंग की।जिसमे वंदना यादव नाकाम रही।जबकि सपना सिंह ने जरूरी समर्थन संख्या का प्रमाण दोनो नेताओ को उपलब्ध कराया।लिहाजा अचानक सपना सिंह को बीजेपी की सदस्यता के बाद पार्टी की प्रत्याशी घोषित कर दिया गया।

दूसरी ओर सपना सिंह के मुकाबले सपा से चुनाव लड़ रहीं कुसुमलता यादव को पार्टी का टिकट मिलने के बाद से ही सपा के कई जिला पंचायत सदस्यों और समर्थक सदस्यों का विरोध झेलना पड़ रहा है। ऐसे विरोध पार्टी की बैठकों में देखने को मिले। वही पार्टी के कई वरिष्ठ नेता कुसुमलता को पार्टी प्रत्याशी मानकर जीत के लिए कवायद में जुटे हुए है।लेकिन समर्थक सदस्यों को अभी तक सपा के नेता सन्तुष्ट करने में कामयाब नही हो पाए थे। ऐसे में मामला सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव तक पहुंचा।सपा मुखिया ने पार्टी के जिला पंचायत सदस्यों, समर्थक सदस्यों और जिले के बड़े नेताओं की मीटिंग भी लखनऊ में की।बताया जा रहा है कि इस मीटिंग में तकरीबन दो दर्जन से ज्यादा जिला पंचायत सदस्य मौजूद थे।अखिलेश यादव ने सभी की बात सुनने के बाद सपा प्रत्याशी की जीत के लिए एकजुट होकर काम करने को कहा।

जबकि अखिलेश यादव ने दिग्गज नेताओं को पार्टी की जीत के लिए अलग अलग दायित्व भी सौंपा।जिसमे पूर्व मंत्री ओमप्रकाश सिंह,विधायक सुभाष पासी और विधायक वीरेंद्र यादव को खास जिम्मेदारी दी गयी।लखनऊ के बाद जिले में भी इस मसले पर दिग्जजों ने जिला पंचायत सदस्यों के साथ बैठक की। जिसके बाद भी सपा की प्रत्याशी को लेकर एकजुटता बन पायी है या नही? यह तो चुनाव परिणाम ही बताएंगे। वैसे दिग्गज सपाई जीत का दावा कर रहे हैं।

दूसरी ओर विशाल सिंह चंचल की अगुवाई में चुनाव लड़ रही सपना सिंह की राजनैतिक रणनीति बेहद सधी हुई नजर आ रही है।ऐसे में देखना होगा कि पिछले 3 दशक से जिला पंचायत अध्यक्ष की कुर्सी पर काबिज रहने वाली सपा इस बार अखिलेश यादव का सपना पूरा कर पाती है या विशाल सिंह चंचल के राजनैतिक संरक्षण में चुनाव लड़ रहीं सपना सिंह अखिलेश के सपने पर भारी पड़ती हैं।

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